प्यार के भंवर गहरे से हैं,
नित नए रंग छलके से हैं,
ज़र्रे ज़र्रे में मै दीवाना सही.....
मगर तुम मिलो तो कही.....
अंदाज़ ये हैरान से है,
शबनम से तुम पे बह से गए है.....
अपनों में मै बैगाना सही,
मगर तुम मिलो तो सही.....
फूलों की सरगम पे है,
सपनो की मंजिल सी है....
खूबसूरत साथ आशिकाना सही,
अगर तुम मिलो तो सही.....
Tuesday, March 23, 2010
Thursday, March 11, 2010
अभिलाशा
अभिलाशा की गुंजाइश न हो,
क्यूँ मन विचलित शाम न हो ....
अंधियारों में भी रात न हो ,
फिर क्यूँ आंसुओं के जाम न हो....
गेसूओं के आराम न हो,
और प्यार के दो काम न हो....
रन्गीनिअत भरी इन बाँहों में,
इश्क का कहीं नाम न हो......
जब जिंदगी तुम बिन रास न हो,
फिर क्यूँ हम संग साथ न हो....
जब तुम से कोई ख़ास न हो,
तो जन्नत से कम ये बात न हो....
क्यूँ मन विचलित शाम न हो ....
अंधियारों में भी रात न हो ,
फिर क्यूँ आंसुओं के जाम न हो....
गेसूओं के आराम न हो,
और प्यार के दो काम न हो....
रन्गीनिअत भरी इन बाँहों में,
इश्क का कहीं नाम न हो......
जब जिंदगी तुम बिन रास न हो,
फिर क्यूँ हम संग साथ न हो....
जब तुम से कोई ख़ास न हो,
तो जन्नत से कम ये बात न हो....
Wednesday, February 24, 2010
ये दूरियाँ
फासले हो रहे है भारी,
मर जाएगी अब प्रीत हमारी.....
पन्नों में सब सम्मिहित है ये,
ना समझे तो है उलझने हमारी ...
बढ़ रही है मन की हिलोरें,
दूर क्यू हो रही है मंजिल की डोरें....
प्रेम पतिता है जो दिल से सवारीं,
भूल ना जाए कही ये रीत हमारी....
फासले हो रहे है भारी,
मर जाएगी अब प्रीत हमारी.....
मर जाएगी अब प्रीत हमारी.....
पन्नों में सब सम्मिहित है ये,
ना समझे तो है उलझने हमारी ...
बढ़ रही है मन की हिलोरें,
दूर क्यू हो रही है मंजिल की डोरें....
प्रेम पतिता है जो दिल से सवारीं,
भूल ना जाए कही ये रीत हमारी....
फासले हो रहे है भारी,
मर जाएगी अब प्रीत हमारी.....
Thursday, February 11, 2010
दो पल के कारवां
अजनबी सा ये साथ है...
पहलु में मासूमियत ख़ास है..
दो पल ही के कारवां है,
पर मीलों लम्बी दास्ताँ है....
बंदिशों में हो रहा समाँ है,
दिल तब भी हसीन है जवाँ है....
तकल्लुफ है बस लफ्ज़ में,
अंखियों में पर जन्नत बयाँ है....
मग्न सी इन रंगीन राह में,
लहराई जुल्फों की छाँव में,
मासूमियत की खुशबु है....
खूबसूरती का साथ है...
दो पल ही के कारवां है,
पर मीलों लम्बी दास्ताँ है....
पहलु में मासूमियत ख़ास है..
दो पल ही के कारवां है,
पर मीलों लम्बी दास्ताँ है....
बंदिशों में हो रहा समाँ है,
दिल तब भी हसीन है जवाँ है....
तकल्लुफ है बस लफ्ज़ में,
अंखियों में पर जन्नत बयाँ है....
मग्न सी इन रंगीन राह में,
लहराई जुल्फों की छाँव में,
मासूमियत की खुशबु है....
खूबसूरती का साथ है...
दो पल ही के कारवां है,
पर मीलों लम्बी दास्ताँ है....
Monday, February 8, 2010
भीगी रात
भीगी सी बूंदों पे शरमाहट है,
कमसिम से आज क्यूँ खोये से है....
झिलमिल सी चांदनी बिखरी है,
ख़ामोशी से क्यूँ बेखबर से है....
बातें है आँखों में आसमाँ जितनी,
पर लफ्ज़ क्यूँ हमारे सोये से है....
इश्क और निष् से रूबरू है,
फिर कागजों में क्यूँ भिगोये से है....
ये मोती भी तो सपने ही है,
पर अंधेरों में संजोये से क्यूँ है....
भीगी सी बूंदों पे शरमाहट है,
कमसिम से आज क्यूँ खोये से है....
कमसिम से आज क्यूँ खोये से है....
झिलमिल सी चांदनी बिखरी है,
ख़ामोशी से क्यूँ बेखबर से है....
बातें है आँखों में आसमाँ जितनी,
पर लफ्ज़ क्यूँ हमारे सोये से है....
इश्क और निष् से रूबरू है,
फिर कागजों में क्यूँ भिगोये से है....
ये मोती भी तो सपने ही है,
पर अंधेरों में संजोये से क्यूँ है....
भीगी सी बूंदों पे शरमाहट है,
कमसिम से आज क्यूँ खोये से है....
Sunday, January 24, 2010
मुस्कुराती मसरुफियत
मुस्कुराती है मसरुफियत मेरी,
संगीनियत सी है अब ये पहेली ...
हर लम्हा है एक नज्म फेरी,
ऐसे ही जिंदा है मसरुफियत मेरी.....
इन शब्दों में कुछ ख़ास है,
अंतर्मन में आप ही आप है....
कारवां ये अभी भी अहम् है,
दिल्लगी में क्यूँ इतने वहम है....
तिनके सी दूर है अब चिंगारी,
किनारों पे क्यूँ मिलती है मंजिल हमारी....
संगीनियत सी है अब ये पहेली ...
हर लम्हा है एक नज्म फेरी,
ऐसे ही जिंदा है मसरुफियत मेरी.....
इन शब्दों में कुछ ख़ास है,
अंतर्मन में आप ही आप है....
कारवां ये अभी भी अहम् है,
दिल्लगी में क्यूँ इतने वहम है....
तिनके सी दूर है अब चिंगारी,
किनारों पे क्यूँ मिलती है मंजिल हमारी....
Friday, January 1, 2010
तेरे संग
गुनगुनाते हुए दिन थे,
कुछ मीठे कुछ तुम बिन थे.....
गलियों में फिरते,
सपनो में रहते,
जन्नत में संग हम थे....
आँखों में हर बात,
एहसास में हर पल पास,
कितने अच्छे हम संग थे....
शर्मीली शरारत हसीन प्यार,
आगोश में भी कई रंग थे,
गुनगुनाते हुए दिन थे,
जब जब हम संग थे....
कुछ मीठे कुछ तुम बिन थे.....
गलियों में फिरते,
सपनो में रहते,
जन्नत में संग हम थे....
आँखों में हर बात,
एहसास में हर पल पास,
कितने अच्छे हम संग थे....
शर्मीली शरारत हसीन प्यार,
आगोश में भी कई रंग थे,
गुनगुनाते हुए दिन थे,
जब जब हम संग थे....
Thursday, December 3, 2009
बेगारियत
कोशिशों से निहित है ये,
मसरूफ दिल की बातें....
तसल्ली से घायल है अब,
मेरी उलझी उलझी साँसें....
स्याही में डूब गयी है,
चंद पल की बरसातें....
ख़ामोशी से है नैन,
ढूंढते है कुछ सुकून की रातें....
कोशिशों से निहित है ये,
मसरूफ दिल की बातें....
नई सी सोच है बन गयी,
पैमानों से है फिर भी रोज़ टकराते.....
मसरूफ दिल की बातें....
तसल्ली से घायल है अब,
मेरी उलझी उलझी साँसें....
स्याही में डूब गयी है,
चंद पल की बरसातें....
ख़ामोशी से है नैन,
ढूंढते है कुछ सुकून की रातें....
कोशिशों से निहित है ये,
मसरूफ दिल की बातें....
नई सी सोच है बन गयी,
पैमानों से है फिर भी रोज़ टकराते.....
Sunday, November 22, 2009
मनः स्थिति
बिन तुम मेरी प्रीत न साँची,
तुम बिन जीवन सूखी पाती.....
अग्न सी मेरे मन में आती,
बुझ न जाए कही जीवन बाती....
कोशिशों से थक सा रहा हूँ,
क्यूँ नही कोई राह है भाती....
Saturday, November 14, 2009
जन्मदिवस
झिलमिल सी आंखों में डूबी है खुशियाँ,
नजराना ही कुछ ऐसा है आज....
ख्वाबों सी अब सजी है दुनियाँ,
जीवन की है आज नई शुरुआत....
हर कोई है आज नया किरदार,
संभाले रखिये इस दोस्ती के तार....
नजराना ही कुछ ऐसा है आज....
ख्वाबों सी अब सजी है दुनियाँ,
जीवन की है आज नई शुरुआत....
हर कोई है आज नया किरदार,
संभाले रखिये इस दोस्ती के तार....
Wednesday, October 28, 2009
अंतर्मंशा
इस संजीदगी से बहके है हम...
रातों से भी अब होती है बात,
नित घुलती है आपकी याद...
ये रात भी कितनी पागल है,
पल पल जोड़े है कैसे ख्याल..
मंशा तो मेरी है तुमसे ही सजती,
फिर न जाने क्यों है ऐसे हालात...
सांचों में भी मूरत नही मिलती,
इतनी हसीन है सूरत दिखती...
इस संजीदगी से मैंने चाहा,
अंतर्मन में है बसा क्यूँ पाया...
इस कशिश को मैंने अपना बनाया,
बिन तेरे मै क्यों जी न पाया...
रातों से भी अब होती है बात,
नित घुलती है आपकी याद...
ये रात भी कितनी पागल है,
पल पल जोड़े है कैसे ख्याल..
मंशा तो मेरी है तुमसे ही सजती,
फिर न जाने क्यों है ऐसे हालात...
सांचों में भी मूरत नही मिलती,
इतनी हसीन है सूरत दिखती...
इस संजीदगी से मैंने चाहा,
अंतर्मन में है बसा क्यूँ पाया...
इस कशिश को मैंने अपना बनाया,
बिन तेरे मै क्यों जी न पाया...
Wednesday, September 30, 2009
प्रेम पतिता
फ़िदा है ये साज़ हमारे,
निहित है इनमे राज़ सारे....
छंद छंद में प्रेम मोह,
शब्दों में भी यही रोग है....
अनूठे से अलंकार,
भाव विभोर वो नित ओर है ...
अमृत है प्रेम रस,
पिरोये संग जो प्रीत है ...
इन छंद पे है नाज़ हमारे,
फ़िदा है ये साज़ सारे....
Monday, September 14, 2009
खामोशी
.
इस खामोशी का कोई जवाब नहीं,
अंदाजे खुशी है तो कोई बात नहीं....
नब्जों में है अब तस्वीर वही,
उस तस्वीर किनारे मै फ़कीर सही....
लहराई जुल्फों की है कोई आस नहीं,
बस कुछ लम्हों की ये बात नही.....
अब लम्हों के है कोई पल ही नही,
पल पल के लम्हों की है बात नयीं.....
हो जाए अगर तो ये ख्यालात नहीं,
प्रेम है ये कोई सौगात नहीं.....
.
इस खामोशी का कोई जवाब नहीं,
अंदाजे खुशी है तो कोई बात नहीं....
नब्जों में है अब तस्वीर वही,
उस तस्वीर किनारे मै फ़कीर सही....
लहराई जुल्फों की है कोई आस नहीं,
बस कुछ लम्हों की ये बात नही.....
अब लम्हों के है कोई पल ही नही,
पल पल के लम्हों की है बात नयीं.....
हो जाए अगर तो ये ख्यालात नहीं,
प्रेम है ये कोई सौगात नहीं.....
.
Wednesday, September 2, 2009
नजराना
.
असर छोडा है कुछ यूँ इस अंदाज़ से,
होश में ही नही उस हसीन से जवाब से.........
पलके है टिकी उस महकते से ख्वाब से,
इक नजराना है मिला मुझे इस लिहाज़ से.......
सोच है ये साची, जानते है ये आप से,
सपनो में जो है रहे अब वो प्यार से.......
सिमटी है दुनिया कुछ ऐसे ही ख्याल से,
मर मिटे है हम तेरे उस सवाल से.....
..
असर छोडा है कुछ यूँ इस अंदाज़ से,
होश में ही नही उस हसीन से जवाब से.........
पलके है टिकी उस महकते से ख्वाब से,
इक नजराना है मिला मुझे इस लिहाज़ से.......
सोच है ये साची, जानते है ये आप से,
सपनो में जो है रहे अब वो प्यार से.......
सिमटी है दुनिया कुछ ऐसे ही ख्याल से,
मर मिटे है हम तेरे उस सवाल से.....
..
Tuesday, August 18, 2009
कशमकश
कशमकश में है ये साँसे,
बतलाती है कितनी बातें....
कुछ ढूंढती है राहें,
पर मिल जाती है फिर से रातें....
मशक्कत सी है अब मेरे दिल में,
कुछ अंदाज़ है फिर भी गाते.....
अजब गजब सी है ये बातें,
मचल रही है अब मेरी साँसे....
परिचित सा है एहसास ये ख़ास,
जन्मो से है वो मेरे इतने पास....
.
बतलाती है कितनी बातें....
कुछ ढूंढती है राहें,
पर मिल जाती है फिर से रातें....
मशक्कत सी है अब मेरे दिल में,
कुछ अंदाज़ है फिर भी गाते.....
अजब गजब सी है ये बातें,
मचल रही है अब मेरी साँसे....
परिचित सा है एहसास ये ख़ास,
जन्मो से है वो मेरे इतने पास....
.
Saturday, August 1, 2009
एहसास
इक बूँद से ये एहसास है....
कोई कैसे इतने पास है।
मेरी नज्मों का वो साज़ है....
अब हर पल वो मेरे साथ है।
अन्तरंग में एक छवि सी है सजी....
वो बूँद है मेरी आंखों में बसी।
संजोये है मेरी साँसे सजल....
बांधे है मेरी खुशियों के पल।
मासूम से मेरे अल्फाज़ है....
पर अब वो मेरी सरताज है।
इक बूँद से ये एहसास है....
कोई कैसे इतने पास है।
कोई कैसे इतने पास है।
मेरी नज्मों का वो साज़ है....
अब हर पल वो मेरे साथ है।
अन्तरंग में एक छवि सी है सजी....
वो बूँद है मेरी आंखों में बसी।
संजोये है मेरी साँसे सजल....
बांधे है मेरी खुशियों के पल।
मासूम से मेरे अल्फाज़ है....
पर अब वो मेरी सरताज है।
इक बूँद से ये एहसास है....
कोई कैसे इतने पास है।
Sunday, July 26, 2009
सोच
इन पलकों के दरम्यान.....
है अब कहानी मेरी।
रहे अब वहाँ खुशी.....
यही है मानी मेरी॥
लफ्जों में भी न बात है.....
ऐसी है कहानी मेरी।
आंखों ही में मुलाकात है.....
कितनी है वो सयानी मेरी॥
सपनो में भी अब साथ है.....
प्यारी है वो रानी मेरी।
नूर सा बस गया हूँ.....
क्यूँ न रहे वो दीवानी मेरी॥
इन पलकों के दरम्यान,
ही अब है जिंदगानी मेरी...
है अब कहानी मेरी।
रहे अब वहाँ खुशी.....
यही है मानी मेरी॥
लफ्जों में भी न बात है.....
ऐसी है कहानी मेरी।
आंखों ही में मुलाकात है.....
कितनी है वो सयानी मेरी॥
सपनो में भी अब साथ है.....
प्यारी है वो रानी मेरी।
नूर सा बस गया हूँ.....
क्यूँ न रहे वो दीवानी मेरी॥
इन पलकों के दरम्यान,
ही अब है जिंदगानी मेरी...
Monday, July 20, 2009
चंद पाती..
तुमसे ही...
छुप छुप के,
भीगी स्याही से....
लिखे है चंद पाती.....
तुमसे दूरियां....
कब नजदीकियां गई,
ये एहसास है ये कराती.....
बहके बहके से अक्षर...
है कैसे खुराफाती...
मेरी नजरो से देखो.....
है पल पल ये तुम्हे निहारती...
छवि सी है....
ये तेरी बनाती,
उन्हें ही देखते हुए....
लिखता हु मै ये चंद पाती.....
छुप छुप के,
भीगी स्याही से....
लिखे है चंद पाती.....
तुमसे दूरियां....
कब नजदीकियां गई,
ये एहसास है ये कराती.....
बहके बहके से अक्षर...
है कैसे खुराफाती...
मेरी नजरो से देखो.....
है पल पल ये तुम्हे निहारती...
छवि सी है....
ये तेरी बनाती,
उन्हें ही देखते हुए....
लिखता हु मै ये चंद पाती.....
Sunday, July 19, 2009
तेरी मूरत
आगाज़ है उस मोड़ से,
जिस पर कही अंत नही...
ये सफर है तेरे मेरे प्रेम का,
जिससे मै जुड़ा हुआ हूँ...
रोज़ इक नई सड़क है,
वहाँ भी तेरी ही मूरत है..
तस्लीफ से उसे
देखता ही रहता हूँ...
उसी की तरफ़ बढता रहता हूँ...
ये सफर है तेरे मेरे प्रेम का,
जिससे मै जुड़ा हुआ हूँ...
दो रास्ता भी जब,
अगर कभी पाया है..
एक पे गम,
दुसरे पे तेरी खूबसूरत काया है ...
ये सफर है तेरे मेरे प्रेम का,
जिससे मै जुड़ा हुआ हूँ...
अब जिसका कही अंत नही....
जिस पर कही अंत नही...
ये सफर है तेरे मेरे प्रेम का,
जिससे मै जुड़ा हुआ हूँ...
रोज़ इक नई सड़क है,
वहाँ भी तेरी ही मूरत है..
तस्लीफ से उसे
देखता ही रहता हूँ...
उसी की तरफ़ बढता रहता हूँ...
ये सफर है तेरे मेरे प्रेम का,
जिससे मै जुड़ा हुआ हूँ...
दो रास्ता भी जब,
अगर कभी पाया है..
एक पे गम,
दुसरे पे तेरी खूबसूरत काया है ...
ये सफर है तेरे मेरे प्रेम का,
जिससे मै जुड़ा हुआ हूँ...
अब जिसका कही अंत नही....
Saturday, July 18, 2009
अजब सी मिठास
कुछ लफ्ज़ हमारे यूँ बिखरे,
स्याही ने भी कदम कुरेद दिए..
सोच में ही अभी थे हम,
और संजीदे खींच गए..
कुछ अजब ही मिठास थी आज,
अंतराग्नि तक वे बस गए..
मिश्री सी थी जैसे आज स्याही में,
बहकते ही चले गए..
मोह में थे जनाब के,
पर असर ही कुछ ऐसा हुआ..
आज लफ्जों से ही प्रेम कर गए..
स्याही ने भी कदम कुरेद दिए..
सोच में ही अभी थे हम,
और संजीदे खींच गए..
कुछ अजब ही मिठास थी आज,
अंतराग्नि तक वे बस गए..
मिश्री सी थी जैसे आज स्याही में,
बहकते ही चले गए..
मोह में थे जनाब के,
पर असर ही कुछ ऐसा हुआ..
आज लफ्जों से ही प्रेम कर गए..
Friday, July 17, 2009
मिटते पल
पल पल मिट रहे कल है,
चार पल हम है..
चार पल को कल है ..
सब कल की ही बात है..
जितने भी मेरे पल है।
सपने भी अब केवल पल है,
मेरी भीगी आंखों का जल है..
अब बस कुछ ही पल है..
जो अब मेरा कल है।
पल पल मिट रहे कल है,
चार पल हम है..
चार पल को कल है.....
चार पल हम है..
चार पल को कल है ..
सब कल की ही बात है..
जितने भी मेरे पल है।
सपने भी अब केवल पल है,
मेरी भीगी आंखों का जल है..
अब बस कुछ ही पल है..
जो अब मेरा कल है।
पल पल मिट रहे कल है,
चार पल हम है..
चार पल को कल है.....
Monday, July 13, 2009
बिन फेरे हम तेरे
ऐसा क्यूँ हो रहा है,
नब्ज़ ही नहीं अब होश में,
रोज़ इक नया जन्म है,
इन फेरों से मशक्कत में,
मीठी सी मुस्कान लिए रहता हूँ,
तेरे ही सवेरों में..
है बिन फेरे हम तेरे,
फिर क्यूँ है तू इन फेरों में...
नब्ज़ ही नहीं अब होश में,
रोज़ इक नया जन्म है,
इन फेरों से मशक्कत में,
मीठी सी मुस्कान लिए रहता हूँ,
तेरे ही सवेरों में..
है बिन फेरे हम तेरे,
फिर क्यूँ है तू इन फेरों में...
संजिली बूँदें
पलकों के झरोखों से झांकते,
खामोश नज्मे भी पढ़ते है,
फिर क्यूँ सजने से डरते है ये नयन तरसे।
इन महकती बूंदों की कवायद नही ये,
की आज ये राज़ भी हमें बता दिया,
सहमे हुए थे हम,
पर संजीले रंग में नहला दिया।
खामोश नज्मे भी पढ़ते है,
फिर क्यूँ सजने से डरते है ये नयन तरसे।
इन महकती बूंदों की कवायद नही ये,
की आज ये राज़ भी हमें बता दिया,
सहमे हुए थे हम,
पर संजीले रंग में नहला दिया।
तिनके का घरौंदा
बेखबर साँसों में एक रूह नहमी है,
थाम लू आज इस सिसकते वक़्त को,
पर होठों पे उनके कुछ लफ्ज़ है,
फिर कैसे रोकूँ इस वक़्त को,
भंवर मे अब है दिल,
तिनके संजोये बैठा है,
उस घरौंदे में,
जिसने उसे जाना ही नहीं है ।
थाम लू आज इस सिसकते वक़्त को,
पर होठों पे उनके कुछ लफ्ज़ है,
फिर कैसे रोकूँ इस वक़्त को,
भंवर मे अब है दिल,
तिनके संजोये बैठा है,
उस घरौंदे में,
जिसने उसे जाना ही नहीं है ।
सपनो का महल
भीगी पलकों की आहट सी हुई,
जाने हमें चाहत सी हुई,
चंद लफ्जो का आगाज़ सा लगा,
फिर एक सपनो का महल सा सज़ा।
जाने हमें चाहत सी हुई,
चंद लफ्जो का आगाज़ सा लगा,
फिर एक सपनो का महल सा सज़ा।
Sunday, July 12, 2009
सच ही तो है ये
चंद लफ्ज़ और साज़ बहके है,
ख्याल में....
तिल तिल नब्ज़ सहमे है,
उनके इंतज़ार में....
साथ ही है अब इतना खूबसूरत,
क्यूँ हो रहे हम प्यार में....
ख्याल में....
तिल तिल नब्ज़ सहमे है,
उनके इंतज़ार में....
साथ ही है अब इतना खूबसूरत,
क्यूँ हो रहे हम प्यार में....
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